तेंदुए को तार में फंसा कर बेरहमी से उतारा था मौत के घाट, CJM कोर्ट ने दो किसानों को दी तीन साल की सजा

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तेंदुए को तार में फंसा कर बेरहमी से पत्थरों से मार-मारकर उतारा था मौत के घाट, CJM कोर्ट ने दो किसानों को दी तीन साल की सजा

लखन राजपूत,छतरपुर,

छतरपुर। किसानों ने जंगली जानवरो से खेतो की रखवाली के लिए लोहे के तार फैलाकर फंदे लगाए थे। तार में तेंदुए के फस जाने से उसे मारकर फेक दिया था। सीजेएम की कोर्ट ने मामले में दो आरोपियो को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की कठोर कैद के साथ 30 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।

अभियोजन कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार 27 मार्च 2010 को वनरक्षक महेंद्र सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि पार्क रेंज चंद्रनगर बीट राजगढ़ के जंगल की सीमा से लगे खेतों की बाड़ी में नंगे लोहे के तार फैले हैं। वन स्टाफ मौके पर पहुंचा और लल्ले अहिरवार एवं नत्थू अहिरवार निवासी टपरियन के खेतो की चैकिंग की। खेतो के चारों ओर लकड़ी की 12 खूटी जमीन में गढ़ी थी और खूटी से लोहे के जीआई तार बांधकर खेतों की बाड़ी में फैले थे। लल्ले और नत्थू के खेत परिक्षेत्र चंद्रनगर के कक्ष क्रमांक आरएफ 666 एवं आरएफ 667 की सीमा एवं बाघ संरक्षित क्षेत्र परिक्षेत्र चंद्रनगर की सीमा में लगे है। लल्ले और नत्थू के मौजूदगी में वन स्टाफ ने मौके से तार और खूटी जब्त की। लल्ले ने पंछतांछ पर बताया कि 25-26 मार्च की दरम्यानी रात्रि को करीब 3 बजे तेंदुआ के दहाडऩे की आवाज सुनी। सुबह जाकर देखा तो फंदे में तेंदुआ फसा था। पकड़े जाने के डर के करण तेंदुआ को पत्थरो से मारकर चंद्रनगर पार्क जंगल में फेक आए। वन विभाग ने मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया।

सीजेएम एमडी रजक की अदालत ने दी सजा:

अभियोजन की ओर से एडीपीओ अमितमणि त्रिपाठी ने मामले के सबूत कोर्ट के सामने रखे। सीजेएम एमडी रजक ने फैसला दिया है कि प्रकृति के वन्य जीव भारत में विलुप्त हो रहे है। उनके संरक्षण के लिए सरकार के द्वारा काफी प्रयास किए जा रहे है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 9/51 में लल्ले और नत्थू को तीन-तीन साल की कठोर कैद के साथ 15-15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।