Economy News In Hindi : Aviation Industry/ covid-19/ Aviation companies are flying with 33% capability, demand from the tourist route is still 0, demand from metro cities to non metro cities | एयरलाइंस 33% क्षमता के साथ उड़ान भर रहीं; बड़े से छोटे शहरों की तरफ जा रहे लोग, टूरिस्ट रूट पर डिमांड जीरो

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  • एयरलाइंस कंपनियों की 90% कमाई पैसेंजर ट्रैवल से होती है
  • भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा एविएशन बाजार है

अजीत सिंह और वर्षा पाठक

Jun 26, 2020, 01:33 PM IST

नई दिल्ली. देशव्यापी लॉकडाउन के 62 दिन के बाद 25 मई से घरेलू रूट्स पर फ्लाइट चल रही हैं। 15 दिनों में सभी कंपनियां एयर ट्रैफिक रेगुलेटर डीजीसीए के निर्देशों के आधार पर फ्लाइट ऑपरेट कर रही हैं। 20 दिनों के आंकड़ों से पता चलता है कि एयरलाइंस अभी 33% क्षमता के साथ उड़ान भर रही हैं। बड़े शहरों से छोटे शहरों की ओर जानेवालों की संख्या ज्यादा है, जबकि टूरिस्ट रूट पर डिमांड जीरो है।  

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स पर अभी भी प्रतिबंध है। लेकिन विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए कंपनियां चाहें तो चार्टर्ड फ्लाइट या किसी भी फ्लाइट का इस्तेमाल कर सकती हैं। यह वंदे भारत के अलावा है। चार्टर्ड फ्लाइट पर रोक नहीं है। वर्तमान में चार प्रमुख विमानन कंपनियां इंडिगो, स्पाइस जेट, एयर इंडिया, गो एयर फ्लाइट्स चला रही हैं।  

भारत में कुल कितनी फ्लाइट्स ऑपरेट हो रही हैं ?

सामान्य दिनों में 2,700 डोमेस्टिक फ्लाइट्स ऑपरेट होती थीं। इस समय केवल एक तिहाई फ्लाइट को ही चलाया जा रहा है। यानी करीब 900 फ्लाइट्स चल रही हैं।

वर्तमान में कितने रूट्स पर फ्लाइट्स ऑपरेट हो रही है ?

लॉकडाउन के बाद करीब 383 रूट्स पर फ्लाइट चल रही हैं। इस समय नॉन मेट्रो सिटी रूट्स के लिए सबसे अधिक बुकिंग मिल रही है। सबसे ज्यादा बुक होने वाले रूट्स दिल्ली-पटना और मुंबई-बनारस हैं। इसके साथ ही दिल्ली-बागडोगरा, बेंगलुरू-पटना, दिल्ली-श्रीनगर है। यानी कि पटना, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, गुवाहाटी जैसे शहरों के लिए सबसे ज्यादा फ्लाइट्स की बुकिंग हो रही है।

किस रूट पर कितना आक्यूपेंसी है? किस रूट पर ज्यादा और कम है?

ज्यादा आक्यूपेंसी मुंबई से वाराणसी, लखनऊ, पटना, रांची के लिए है। थोड़ा बहुत बेंगलुरु के लिए भी है।

अभी टूरिस्ट प्लेस पर क्या स्थिति है?

इस समय टूरिस्ट प्लेस पर कोई नहीं जा रहा है, क्योंकि जाने के बाद 14 दिन और आने के बाद 14 दिन का क्वारैंटाइन का नियम लागू हो सकता है। टूरिस्ट प्लेस पर रेस्तरां, बार, पब बंद हैं, लिहाजा लोग यहां जाने से कतरा रहे हैं।

टोटल रूट्स पर पहले कितना लोड फैक्टर था और अब कितना है?

लोड फैक्टर कोविड के पहले 80-90 प्रतिशत था। इस समय 60 प्रतिशत है। हालांकि पहले भी कभी-कभी सीजन नहीं होने पर लोड फैक्टर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।

क्या कहना है डीजीसीए का ?

डीजीसीए चीफ अरुण कुमार बताते हैं कि हमने विमानन कंपनियों को अभी जो शेड्यूल दिया है उसके मुताबिक, 33 प्रतिशत रूट पर फ्लाइट ऑपरेट करना है। वर्तमान में वे 23-25 प्रतिशत पर ऑपरेट कर रहे हैं क्योंकि हर राज्यों के अपने नियम हैं। डीजीसीए के मुताबिक पहले चरण में फ्लाइट सभी रूट पर ऑपरेट की जाएंगी। इसके तहत कुल 35 शहरों से फ्लाइटें उडेंगी और 39 शहरों में यह उतरेंगी।

ये एयरलाइंस भर रही हैं 33 प्रतिशत की क्षमता के साथ उड़ानें 

इंडिगो की वेबसाइट के मुताबिक उसके पास कुल 262 एयरक्राफ्ट हैं। यह 63 घरेलू रूट्स पर उड़ान भरते थे। अभी 33 प्रतिशत नियमों के मुताबिक कंपनी 86 फ्लाइट को उड़ा रही है। यह करीबन 20 रूट्स पर चल रही है।

कुल फ्लाइट्स- 330 फ्लाइट (270 डोमेस्टिक और बाकी इंटरनेशनल थीं)। 36 डेस्टिनेशन पर यह उड़ान भरती थी। फिलहाल कंपनी 40 से 50 फ्लाइट ऑपरेट कर रही है। वर्तमान में कुल 15-18 रूट्स पर यह उड़ान भर रही है।  

  • स्पाइसजेट

स्पाइस जेट के पास कोविड-19 से पहले कुल 600 फ्लाइट्स थीं और यह 64 डेस्टिनेशन पर उड़ानें भरती थीं। वर्तमान में कंपनी की 85 फ्लाइट्स हैं और यह 41 डेस्टिनेशन पर उड़ान भर रही है। डीजीसीए के मुताबिक स्पाइसजेट का लोड फैक्टर फरवरी में 93 प्रतिशत था मार्च में 85 प्रतिशत था। मई में 60 प्रतिशत था। फिलहाल मुंबई से 7 फ्लाइट उड़ रही हैं।

  • एयर इंडिया

सरकारी कंपनी एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि कोविड-19 से पहले कंपनी 172 फ्लीट को ऑपरेट करती थी। घरेलू रूट पर कुल 56 डेस्टिनेशन पर उसकी फ्लाइट ऑपरेट होती थी। वर्तमान में एअर इंडिया डीजीसीए के नियमों के मुताबिक 33 प्रतिशत फ्लाइट उड़ा रही है। इसका मतलब 56 फ्लाइट्स को 18 रूट पर उड़ा रही है।
एयर इंडिया ने कहा कि उसने पहले चरण में वंदे भारत के तहत कुल 12 देशों में 19 डेस्टिनेशन पर अपनी फ्लाइट भेजी, जबकि दूसरे चरण में 49 देशों के 63 डेस्टिनेशन और तीसरे चरण में 41 देशों के 51 डेस्टिनेशन पर उसने फ्लाइट भेजी। एयर इंडिया ने कहा कि डिमांड धीरे-धीरे बढ़ रही है। साथ ही इसने कहा कि यह पर्यटन वाले स्थलों पर भी विमान उड़ा रहा है।

दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार

भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा एविएशन बाजार है और इसे अगले चार पांच साल में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनाने का लक्ष्य था, लेकिन कोरोना की वजह अब तो इस यह लक्ष्य कई साल पीछे चला गया है।

हर दिन होता था 4500 उड़ानों का संचालन

भारत से हर दिन करीब 4500 डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट्स का संचालन किया जाता है, इनमें से करीब 600 इंटरनेशनल फ्लाइट होती थीं। अकेले दिल्ली से ही हर दिन करीब 900 उड़ानों का संचालन होता है।

अनलॉक में ऐसे बदला नियम

15 जून तक केंद्र सरकार ने 33 प्रतिशत विमानों को उड़ाने का निर्देश दिया था। 16 जून से इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। हालांकि अभी इसकी समीक्षा एविएशन कंपनियां करेंगी कि डिमांड है भी या नहीं, इसके बाद इस पर उड़ाने का फैसला लिया जाएगा।
गो एयर के प्रवक्ता ने कहा कि उदाहरण स्वरूप मुंबई से 15 जून तक रोजाना केवल 25 फ्लाइट उड़ाने का नियम राज्य सरकार का था। 16 जून से यह 50 फ्लाइट हो गई है। यानी अब 50 उड़ेंगी और 50 उतरेंगी। जब मुंबई बंद है तो कहीं भी फ्लाइट उड़ाना मुश्किल है। मुंबई एयरपोर्ट पर कोविड-19 से पहले 1,000 फ्लाइटें आती और जाती थीं। गो एयर के पास अब मुंबई से 6 फ्लाइट उड़ाने के लिए मंजूरी मिली है।

यह समय एक्सपेरिमेंट करने का नहीं है

एयरलाइन कंपनियां कहती हैं कि एयरलाइंस के पास एक्सपेरिमेंट करने का स्कोप इस समय बहुत कम है। पहले सेक्टर शुरू करने पर 40-50 प्रतिशत लोड फैक्टर होता था तो भी चल जाता था। लेकिन अब हालात उलटे हैं। अब सोच समझकर इसे ऑपरेट करना होगा। खर्चों पर अंकुश रखना पडेगा।

एविएशन कंपनियां कहती हैं कि मंत्रालय अगर कैप न लगाता तो कुछ भी किराया हो सकता था। हालांकि अभी किराया पर कैप है। कंपनियों का कहना है कि रूल रेगुलेशन को फॉलोअप करने की लागत, पायलट क्वारंटीन होता है तो वह लागत भी कंपनी पर आती है। कंपनी के कास्ट में इजाफा होता है।

यही नहीं, जो फ्लाइट जा रही हैं, वह रिटर्न में खाली आती है। जैसे मुंबई से श्रीनगर फ्लाइट जाती है, लेकिन आते समय एक भी सीट बुक नहीं होती। पटना या रांची या वाराणसी भी इसी तरह से है। दिल्ली जैसे बड़े शहरों से छोटे शहर की ओर लोग जा रहे हैं पर वापस नहीं आ रहे हैं।

जब तक पूरी इकोनॉमी नहीं खुलेगी, एविएशन नहीं खुलेगा

एक लीडिंग एयरलाइंस के प्रवक्ता ने कहा कि इकोनॉमी खुलेगी तो एयरलाइंस चलेगी। जब इकोनॉमी नहीं खुलेगी तो एयरलाइंस कहां चलेगी? होटल बंद है। लोग मीटिंग कहां करेंगे? दो घंटे की मीटिंग के लिए 30 दिन लग सकते हैं। क्योंकि 14 दिन जाने पर और 14 दिन आने पर क्वारंटाइन का नियम लागू हो सकता है। इसलिए एयरलाइंस अभी मुश्किल में हैं।

सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन इंडिया (CAPA) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की एयरलाइंस कंपनियों को अप्रैल-जून की तिमाही में सबसे ज्यादा कमाई होती है, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस साल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

फ्लाइट बंद होने के चलते फ्यूल, ग्राउंड हैंडलिंग, एयरपोर्ट चार्ज पर होने वाला खर्च बच रहा है, लेकिन सैलरी, अलाउंसेस, लीज रेंट और मिनिमम मेंटेनेंस और इंटरेस्ट पेमेंट कंपनियों को देना होगा। विमानन कंपनियों की 90% कमाई पैसेंजर ट्रैवल से होती है।

 
पहली तिमाही में नुकसान

पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच एयरलाइंस को कुल 27,000 करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका जताई गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व जनरल मैनेजर जीएस बावा ने कहा कि आईएटीए (इंटरनेशनल एयर ट्रैफिक एसोसिएशन) का एक डेटा कहता है कि कोविड -19 के प्रकोप के कारण ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री को करीब 25 बिलियन डॉलर (1.Eight लाख करोड़ रुपए) का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में एविएशन इंडस्ट्री को नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक पैकेज की जरूरत होगी।

इक्रा ने कहा कि मई के अंतिम हफ्ते में एयरलाइंस का लोड फैक्टर 44 से 57 प्रतिशत का रहा है। हालांकि एविएशन सेक्टर को दो अंकों की वृद्धि के लिए काफी इंतजार करना पड़ सकता है। जबकि जनवरी से मई के दौरान घरेलू स्तर पर लोड फैक्टर में 43.39 प्रतिशत की गिरावट आई थी। एक जून से 20 जून तक कुल 67,000 यात्रियों ने फ्लाइट से यात्रा की है। मई में प्रति फ्लाइट यात्रियों की संख्या 138 थी ज 14 जून को घटकर 102 और 20 जून को घटकर 89 हो गई।

आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से मई 2019 के बीच कुल 58.6 मिलियन यात्रियों ने घरेलू रूट पर यात्रा की थी। इस साल इसी अवधि में यह घटकर 33 मिलियन पर आ गई है। पहली तिमाही में कुल नुकसान Three से 3.6 अरब डॉलर होने की आशंका है। इसमें से आधा नुकसान एयरलाइंस कंपनियों को होगा तो आधा एयरपोर्ट को होगा।

इकोनाॅमी पर बुरा असर

कोविड-19 महामारी और लाॅकडाउन के चलते दुनियाभर के देश समेत भारत की इकोनाॅमी पर बुरा असर पड़ा है। एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि पूरी तरह से प्रतिबंध खत्म होने के बाद लोगों में भरोसा जमने में कम से कम छह महीने लग जाएंगे।

 फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (FICCI) के मुताबिक फ्लाइट्स के कैंसिल होने से मार्च में ही भारत के एविएशन इंडस्ट्री को करीब 8,400 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है और उनके कुल रेवेन्यू में करीब 40 फीसदी की गिरावट आ चुकी थी। सामान्य दिनों में भारतीय एयरलाइंस को हर दिन करीब 400 करोड़ रुपएका रेवेन्यू हासिल होता था।  

डोमेस्टिक मार्केट में इन कंपनियों का मार्केट शेयर 

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक इंडिगो को शुरुआती 21 दिनों के लॉकडाउन के समय 5494 करोड़ रुपए के नुकसान होने की आशंका है । जबकि स्पाइसजेट को करीब 1412 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। दूसरी एयरलाइंस कंपनियों को भी लॉकडाउन के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। बता दें कि इंडिगो की डोमेस्टिक मार्केट में 47.5%  हिस्सेदारी है। वहीं स्पाइसजेट की हिस्सेदारी 16.5% है। गोएयर की बात करें तो डोमेस्टिक मार्केट में इसकी 10.02% हिस्सेदारी  है।

एयर इंडिया 90 फीसदी कमाई पैसेंजर ट्रैवल से करती है

एक अनुमान के मुताबिक, लाॅकडाउन के दौरान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द होने के चलते एयर इंडिया को प्रतिदिन 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान होने की संभावना जताई गई है। एयर इंडिया के मुताबिक फ्लाइट बंद होने के चलते फ्यूल, ग्राउंडड हैंडलिंग, एयरपोर्ट चार्ज पर होने वाले खर्च की बचत हो रही है। बता दें कि एअर इंडिया की रोजाना की आमदनी करीब 60 से 65 करोड़ रुपए है। इसमें से 90 फीसदी कमाई पैसेंजर ट्रैवल से होती है।

एयर इंडिया की मानें, तो लाॅकडाउन के समय पैसेंजर ट्रैवल से होने वाली कमाई पूरी तरह से ठप रही। एयरलाइन को कर्मचारियों की सैलरी के तौर पर 250 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करने होते हैं, जबकि एरक्राफ्ट की लीज और रेंट पर करीब प्रतिमाह 30 मिलियन डॉलर का खर्च आता है। एयरलाइंस ने करीब 21 बोइंग B787-800s लीज पर ले रखें हैं। जबकि इसके अतिरिक्त 27 एयरबस A320Neo प्लेन की लीज देनी होती है।

एयर इंडिया को एक बोइंग B787 एयरक्राफ्ट के लिए 1 मिलियन डॉलर यानी 10 लाख डॉलर रुपए प्रतिमाह के हिसाब से किराए का भुगतान करना होता है। जबकि A20Neo एयरक्राफ्ट के लिए 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने होते हैं। इसके अलावा, एयरलाइन को अन्य तमाम तरह के ब्याज के रूप में प्रति माह 225 करोड़ रुपए का पेमेंट करना होता है। कंपनी का घरेलू मार्केट शेयर में 11.5% की हिस्सेदारी है।

ये एयरलाइंस पहले ही हो चुकी हैं दिवालिया

भारत में जेट, किंगफिशर, एयरइंडिया जैसे एयरलाइंस तो पहले दिवालिया हो चुके हैं, अब मौजूदा संकट को देखते हुए अन्य एयरलाइंस का दिवालिया होने की आंशका है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो और स्पाइस जेट को अगले वित्त वर्ष में क्रमश: 230 करोड़ रुपए और  525 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका है।



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